May 3, 2026

शिमला में बदला मौसम, बारिश-तूफान चला:अंधेरा सा छाया, 6 जिलों में रात 9 बजे तक चेतावनी, 8 मई तक बारिश से राहत नहीं

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हिमाचल की राजधानी शिमला में दिनभर की धूप के बाद शाम के वक्त अचानक मौसम बदला और बारिश शुरू हो गई है। शिमला के साथ साथ ठियोग, कुफरी, फागू और सोलन के कई क्षेत्रों में भी बारिश हो रही है। मौसम बदलने के बाद शाम 5.30 बजे ही शिमला में अचानक अंधेरा सा छा गया। इस बीच मौसम विभाग ने मंडी, कुल्लू, बिलासपुर, सोलन, सिरमौर और शिमला जिला में रात 9 बजे तक तेज बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। चंबा व कांगड़ा जिला में येलो अलर्ट दिया गया है। किन्नौर और लाहौल स्पीति की ऊंची चोटियों पर हल्की बर्फबारी के आसार है। इस दौरान कई भागों में ओलावृष्टि और तेज तूफान भी चल सकता है। कल यानी 3 मई को किन्नौर और लाहौल स्पीति को छोड़कर अन्य सभी जिलों में येलो अलर्ट की चेतावनी दी गई है, जबकि चार मई को कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिला में ऑरेंज अलर्ट दिया गया है। पांच मई को भी किन्नौर और लाहौल स्पीति को छोड़कर अन्य सभी जिलों में येलो अलर्ट की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार- राज्य में 8 मई तक बारिश के आसार है। दो से तीन डिग्री गिरेगा तापमान मौसम में बदलाव के बाद आज तापमान में दो से तीन डिग्री की गिरावट आएगी। राज्य के ज्यादातर भागों में पहले ही अधिकतम और न्यूनतम पारा सामान्य से नीचे गिरा हुआ है। नाहन का तापमान सामान्य से 5.8 डिग्री नीचे गिरा नाहन के तापमान में सामान्य की तुलना में सबसे ज्यादा 5.8 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है और यहां का पारा 27.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। शिमला का तापमान भी सामान्य से 1.9 डिग्री की गिरावट के साथ 21.8 डिग्री, ऊना का 2.2 डिग्री की कमी के साथ 35.2, मंडी का 1.2 डिग्री नीचे कम के साथ 31.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मैदानी इलाकों के लोगों को गर्मी से राहत मौसम में बदलाव के बाद राज्य के मैदानी इलाकों की जनता ने भीषण गर्मी से राहत की सांस ली है। पहाड़ों पर भी इससे मौसम सुहावना हो गया है। ऐसे में देश के मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी से बचने को पहाड़ों पर पहुंच रहे टूरिस्ट सुहावने मौसम का आनंद उठा रहे हैं। सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ी मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी है। शिमला जिला के कई भागों में पहले ही सेब की फसल ओलावृष्टि के कारण तबाह हो चुकी है। कई जगह सेब के पेड़ के साथ साथ एंटी हेल नेट और बांस भी तबाह हो गए है। सेब के साथ साथ फूलगोभी और मटर की फसल को भी ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है।



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