April 18, 2026

रिकॉर्ड जीत के साथ ‘कैंडिडेट्स’ जीते 20 साल के सिंदारोव:अब 19 वर्षीय गुकेश से सामना; दोपहर में नींद से बचने के लिए चुना था चेस

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उज्बेकिस्तान के 20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर जावोखिर सिंदारोव ने ‘कैंडिडेट्स चेस टूर्नामेंट’ जीता। 13 मैचों में अजेय रहते हुए उन्होंने 6 जीत दर्ज की, जो 2013 में राउंड रॉबिन फॉर्मेट आने के बाद से इस टूर्नामेंट का रिकॉर्ड है। अब वर्ल्ड चैम्पियनशिप में उनका सामना भारत के मौजूदा चैम्पियन 19 साल के डी. गुकेश से होगा। सिंदारोव के पास 2004 के बाद उज्बेकिस्तान को पहला और ओवरऑल सिर्फ दूसरा चैम्पियन देने का मौका है। दूसरी ओर, गुकेश इन दिनों फॉर्म से जूझ रहे हैं और टॉप-10 से भी बाहर हो गए हैं। सिंदारोव – कभी वीडियो गेम्स की लत लग गई थी सिंदारोव ने साढ़े चार साल की उम्र में किंडरगार्टन में दोपहर की नींद से बचने के लिए शतरंज चुना। ट्रेनिंग के बाद 6 महीने में ही दादाजी को हराने लगे और 12 की उम्र में दुनिया के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर्स में शुमार हो गए। बीच में वीडियो गेम्स की लत के कारण उनकी रेटिंग गिर गई। हालांकि, कोविड में वापस करियर पटरी पर लाए। सिंदारोव बेहद शांत स्वभाव के हैं। कैंडिडेट्स में उनकी एक चाल ने नंबर-2 हिकारू नाकामुरा को 67 मिनट तक सोचने पर मजबूर कर दिया। उस माहौल में भी सिंदारोव बेफिक्र उबासी लेते रहे। अंततः दबाव में नाकामुरा से गलती हुई और सिंदारोव जीत गए। 2025 में वर्ल्ड कप जीतने के बाद ताशकंद लौटने पर सैन्य बैंड और प्रधानमंत्री ने उनका स्वागत किया। इस जीत के बाद उन्होंने सबसे पहला मैसेज अपनी 5 साल पुरानी दोस्त, कजाकिस्तान की ग्रैंडमास्टर बिबिसारा असौबायेवा को किया था। कैंडिडेट्स में भी दोनों एक-दूसरे को प्रेरित करते नजर आए थे। गुकेश – चैम्पियंस का वॉलपेपर लगाकर तैयारी करते गुकेश के लैपटॉप का वॉलपेपर दुनिया के 16 विश्व चैम्पियनों की तस्वीरों से सजा था। वे रोज उसे देखते और उन्हीं के बीच होने का सपना बुनते। दिसंबर 2024 में जब खुद विश्व चैम्पियन बने, तो उस ऐतिहासिक फेहरिस्त में उनका नाम भी जुड़ गया। 2021 के लॉकडाउन में उन्हें फिल्मों की ऐसी लत लगी कि वे दिन में दो-दो फिल्में देखने लगे। जैसे ही अहसास हुआ कि यह शतरंज को नुकसान पहुंचा रहा है, उन्होंने तुरंत फिल्मों पर ब्रेक लगा दिया। दही-चावल खाने के शौकीन गुकेश को शतरंज का जुनून ऐसा था कि क्लास टॉपर होने के बावजूद चौथी क्लास के बाद स्कूल छोड़ दिया था। बिना स्कूल गए उन्होंने खिलाड़ियों से बात कर फर्राटेदार इंग्लिश सीखी और दोस्तों के साथ फिल्में देखकर हिंदी समझनी शुरू की। गुकेश की दीवानगी ऐसी थी कि कोच चेस की जो किताबें 2-3 दिन में खत्म करने को देते थे, वे घर जाकर पिता के साथ उन्हें कुछ ही घंटों में हल कर देते थे।



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